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बीजेपी से दूरी, कांग्रेस से नज़दीकी? वरुण–प्रियंका मुलाकात ने राजनीति में घोली नई अटकलें

       नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों यह चर्चा तेज़ है कि भाजपा सांसद वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं और वर्ष 2026 तक गांधी परिवार राजनीतिक रूप से एकजुट होता दिखाई दे सकता है, लेकिन हकीकत में यह दावा फिलहाल ठोस तथ्यों से अधिक अटकलों पर टिका नजर आता है। जनवरी 2026 में सोशल मीडिया और कुछ यूट्यूब चैनलों पर प्रियंका गांधी और वरुण गांधी की कथित मुलाकात की खबरें सामने आने के बाद यह सियासी सरगर्मी और बढ़ गई। गांधी परिवार के भीतर रिश्तों, वरुण गांधी की भाजपा से बढ़ती दूरी और विपक्षी खेमे में संभावित पुनर्संयोजन को जोड़कर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, अब तक न कांग्रेस पार्टी की ओर से, न ही वरुण गांधी या उनके परिवार की तरफ से किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि सामने आई है। ऐसे में यह पूरा मामला फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण, सोशल मीडिया चर्चाओं और संभावनाओं तक ही सीमित दिखाई देता है, जिसे तथ्यात्मक सच मानना अभी जल्दबाज़ी होगी।

       दावे की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई, जब प्रियंका गांधी और वरुण गांधी की कथित मुलाकात की खबरें वायरल हुईं। इन खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर पैदा की, लेकिन कांग्रेस पार्टी, वरुण गांधी या उनके परिवार की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया, जिससे इन दावों की पुष्टि हो सके।

       बीजेपी से वरुण गांधी की दूरी भी इन चर्चाओं की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से टिकट न मिलने के बाद वे पार्टी गतिविधियों में कम दिखाई दिए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर उनकी सार्वजनिक आलोचना ने यह धारणा मजबूत की कि वे किसी नए राजनीतिक विकल्प पर विचार कर सकते हैं।

       कांग्रेस की ओर से न्योता पहले भी दिया जा चुका है। 2024 में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने वरुण गांधी को पार्टी में शामिल होने का खुला प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस समय भी वरुण गांधी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

       फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण ऐसी चर्चाओं के और तेज़ होने की संभावना है, मगर फिलहाल यह सब अनुमान के दायरे में ही है

       वास्तविकता का आकलन करें तो यह खबरें अधिकतर यूट्यूब चैनलों, फेसबुक पोस्ट और अनौपचारिक स्रोतों से सामने आ रही हैं, जिनके पीछे कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

       हालांकि वरुण गांधी का गांधी परिवार से पारिवारिक संबंध (इंदिरा गांधी के पोते होना) स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चाओं को हवा देता है, लेकिन आधिकारिक घोषणा के अभाव में इसे अफवाह ही माना जा रहा है

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