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काले सोने की कीमत पर लाल सियासत: वेनेज़ुएला संकट की जलती कहानी

       नई दिल्ली। वेनेज़ुएला का मौजूदा संकट किसी एक दिन या एक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही राजनीतिक भूलों, आर्थिक अव्यवस्थाओं और हालिया सैन्य हस्तक्षेप का संयुक्त विस्फोट है। लैटिन अमेरिका का यह तेल-समृद्ध देश, जो कभी अपनी समृद्धि और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए जाना जाता था, आज सत्ता संघर्ष, आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय टकराव के केंद्र में खड़ा है। 1990 के दशक के बाद अपनाई गई अत्यधिक केंद्रीकृत और तेल-आधारित नीतियों ने धीरे-धीरे देश की अर्थव्यवस्था को खोखला किया, वहीं लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने से राजनीतिक अस्थिरता गहराती गई। इन परिस्थितियों के बीच अमेरिका द्वारा जनवरी 2026 में काराकस पर किया गया हवाई हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत ने संकट को केवल आंतरिक न रखकर वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव में बदल दिया है, जिससे वेनेज़ुएला आज आर्थिक तबाही, सत्ता संघर्ष और युद्ध की आशंका—तीनों के चौराहे पर खड़ा दिखाई देता है।

संकट की जड़ें

       दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में शामिल वेनेज़ुएला ने अपनी अर्थव्यवस्था को लगभग पूरी तरह तेल पर निर्भर रखा। उद्योगों का विविधीकरण नहीं हुआ, जिससे देश की आर्थिक रीढ़ एक ही संसाधन पर टिकी रह गई।

       1999 के बाद ह्यूगो शावेज़ और फिर निकोलस मादुरो की सरकारों ने सब्सिडी, राष्ट्रीयकरण, मूल्य और मुद्रा नियंत्रण जैसी समाजवादी नीतियां लागू कीं। इन पॉपुलिस्ट फैसलों से निजी क्षेत्र कमजोर हुआ और उत्पादन क्षमता लगातार गिरती चली गई।

आर्थिक तबाही

       तेल की कीमतों में गिरावट के बाद सरकार ने घाटा पूरा करने के लिए अत्यधिक नोट छापे, जिससे हाइपर-इन्फ्लेशन, भोजन और दवाइयों की भारी कमी, व्यापक गरीबी और लाखों लोगों का पलायन शुरू हुआ।

       सरकारी तेल कंपनी PDVSA में राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और निवेश की कमी से तेल उत्पादन गिर गया, जिससे विदेशी आय लगभग ठप हो गई।

लोकतंत्र पर दबाव

       सरकार द्वारा न्यायपालिका, संसद, चुनाव आयोग और मीडिया पर कड़ा नियंत्रण, विपक्ष का दमन और चुनावी धांधली के आरोपों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी के कारण अरबों डॉलर देश से बाहर चले गए, जिससे जनता का असंतोष और बढ़ता गया।

2026: संकट से टकराव तक

       जनवरी 2026 में स्थिति ने खतरनाक मोड़ ले लिया, जब अमेरिका ने काराकस पर हवाई हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया। कई देशों ने इसे वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बताया।

       इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून, क्षेत्रीय अस्थिरता और यहां तक कि तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं पर भी चर्चा हुई।

वैश्विक चेतावनी

       वेनेज़ुएला संकट यह स्पष्ट करता है कि केवल तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था, कमजोर संस्थाएं और गहरा भ्रष्टाचार किसी भी देश को आर्थिक तबाही और राजनीतिक अराजकता की ओर धकेल सकते हैं। साथ ही, बड़ी शक्तियों की सैन्य दखलअंदाज़ी ने इस स्थानीय संकट को अब वैश्विक भू-राजनीतिक टकराव में बदल दिया है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

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