छत्तीसगढ़

एक राजनीतिक सफर का अवसान, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से क्षेत्र में शोक

       दुर्ग। छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक एवं वरिष्ठ नेता डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का 30 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 78 वर्ष के थे और लंबे समय से फेफड़ों संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से भाजपा संगठन, अहिवारा विधानसभा क्षेत्र और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।

22 दिनों से अस्पताल में चल रहा था उपचार

       जानकारी के अनुसार, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा पिछले करीब 22 दिनों से हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती थे। इससे पहले रायपुर और दुर्ग के अस्पतालों में भी उनका उपचार किया गया था। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने के बाद शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिक्षा जगत से राजनीति तक का सफर

       डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का जन्म 12 अगस्त 1948 को हुआ था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने लगभग 26 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। वे वर्ष 1998 में व्याख्याता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

       वे वर्ष 2008 में पहली बार अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे। नवगठित अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक होने का गौरव भी उन्हें प्राप्त था। इसके बाद उन्होंने दोबारा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वर्तमान में भाजपा विधायक के रूप में जनसेवा कर रहे थे।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी रहे

       छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में उन्होंने क्षेत्र के विकास तथा सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री सहित भाजपा नेताओं ने जताया शोक

       उनके निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने उनके निधन को छत्तीसगढ़ की राजनीति और भाजपा संगठन के लिए अपूरणीय क्षति बताया तथा शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

       डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से अहिवारा क्षेत्र ने अपना एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि खो दिया है। उनका शिक्षा जगत से राजनीति तक का सफर और सार्वजनिक जीवन में दिया गया योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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