छत्तीसगढ़

पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी ने केंद्र और राज्यों के साथ बैठक कर सप्लाई व ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की

      नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर देश की तैयारियों की समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

       प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर काम करते हुए देश इस वैश्विक संकट का प्रभावी ढंग से सामना करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता, व्यापारिक निरंतरता, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा है।

क्या रहे बैठक के मुख्य बिंदु?

सप्लाई चेन और बाजार पर सख्ती

       प्रधानमंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि

  • आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे
  • जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर कड़ी कार्रवाई हो
  • राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय रहें

कृषि और उर्वरक पर विशेष फोकस

       आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए

  • उर्वरकों के भंडारण और वितरण की निगरानी
  • किसानों को समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया

तटीय राज्यों को अलर्ट

       समुद्री व्यापार और नौवहन पर संभावित असर को देखते हुए

  • तटीय और सीमावर्ती राज्यों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया

फेक न्यूज पर चेतावनी

       प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि

  • अफवाहें और गलत जानकारी हालात को बिगाड़ सकती हैं
  • सही और विश्वसनीय सूचना का समय पर प्रसार बेहद जरूरी है

राहत के कदम: ईंधन और LPG

       बैठक में यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार ने:

  • पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया
  • वाणिज्यिक LPG आवंटन 50% से बढ़ाकर 70% किया

       इन फैसलों का राज्यों ने स्वागत करते हुए कहा कि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी।

राज्यों का भरोसा और सहयोग

       मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि:

  • देश में पेट्रोल, डीज़ल और LPG की पर्याप्त उपलब्धता है
  • सप्लाई चेन फिलहाल स्थिर बनी हुई है
  • केंद्र के साथ मिलकर हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं

       साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए गए कूटनीतिक और आर्थिक कदमों की सराहना की।

भविष्य की रणनीति

       प्रधानमंत्री ने सिर्फ तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक तैयारी पर भी जोर दिया:

  • सौर ऊर्जा, बायोफ्यूल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा
  • घरेलू तेल और गैस खोज में तेजी
  • MSME और उद्योगों के साथ निरंतर संवाद

       पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने “पैनिक नहीं, प्लानिंग” का रास्ता चुना है।

       केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत तालमेल, ऊर्जा और सप्लाई पर फोकस, और फेक न्यूज पर नियंत्रण—ये तीनों इस रणनीति के अहम स्तंभ हैं।

       अब देखना होगा कि वैश्विक हालात किस दिशा में जाते हैं, लेकिन फिलहाल सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत हर चुनौती के लिए तैयार है।

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