छत्तीसगढ़

आदिवासी उत्थान की राजनीति पर सियासी वार, दीपक बैज ने सीएम साय को लेकर दिया बयान

आदिवासी समाज की उन्नति कांग्रेस की नीतियों और संविधान की देन

       रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री साय ने बयान दिया है कि 50 सालों में कांग्रेस ने जनजातियों के लिए कुछ नहीं किया। साय जी जान ले 50 सालों में कांग्रेस ने आदिवासियों की संस्कृति को बचाये रखा, आदिवासी को जनजाति नहीं बनने दिया। पेसा कानून संविधान में विशेष अधिकार नौकरी में आरक्षण, विधानमंडल में आरक्षण सब कांग्रेस की देन है। साय जी आप आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री है तो इसके पीछे भी कांग्रेस की नीतियां ही है। कांग्रेस ने आदिवासी समाज को आगे बढ़ाया छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का एक आदिवासी नेता के रूप में प्रदेश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना भी उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को दर्शाता है, जिसमें आदिवासी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अवसर प्राप्त हुए हैं। इस व्यवस्था की नींव भारतीय संविधान ने रखी, जिसे बनाने में कांग्रेस की निर्णायक भूमिका रही। कांग्रेस ने आदिवासियों को लाखों वनाधिकार पट्टे दिये। बस्तर का स्वाभिमान, नंदराज पर्वत को बचाये रखा, जिसे भाजपा के डबल इंजन सरकार ने अडानी के चरणों में समर्पित कर दिया।

       दीपक बैज ने कहा है कि भारत में आदिवासी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शिक्षा, सरकारी नौकरियों में अवसर, जल-जंगल-जमीन के अधिकार और संवैधानिक संरक्षण दिलाने में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका रही है। आज छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज का राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व जिस संवैधानिक व्यवस्था के कारण संभव हुआ है, उसकी नींव कांग्रेस के नेतृत्व में बने भारतीय संविधान और कांग्रेस सरकारों की नीतियों ने रखी थी।

       संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था की गई। अनुच्छेद 16(4) सरकारी सेवाओं में पिछड़े वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व के प्रावधान का आधार प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 15(4), 46 और 335 शिक्षा, सामाजिक-आर्थिक उन्नति तथा सेवाओं में अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान हैं।

       संविधान के अनुच्छेद 244 और पांचवीं अनुसूची के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन तथा आदिवासी हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई। अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए अनुदान का प्रावधान भी है। ये व्यवस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारो ने आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान, संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों की रक्षा को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना था।

       वर्ष 1996 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में पेसा कानून (PESA Act) बनाया गया। इस कानून का उद्देश्य पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत करना तथा आदिवासी समुदायों की परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और स्थानीय स्वशासन को संरक्षण देना था। पेसा कानून ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास संबंधी निर्णयों में ग्राम सभाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण स्थान दिया। आदिवासी समाज को अपने गांव, संसाधनों और परंपराओं से जुड़े मामलों में अधिक अधिकार दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम था। भाजपा के कुशासन में बस्तर की जीवन रेखा शबरी नदी, गंडकी, इंद्रावती औद्योगिक प्रदूषण का शिकार हो चुकी है, पानी लाल हो गया है।

       उन्होने कहा है कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी संपत्ति उसकी जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधन हैं। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165(6) में अधिसूचित आदिवासी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के भूमिस्वामियों की जमीन गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध अथवा निर्धारित अनुमति की व्यवस्था कांग्रेस के सरकार द्वारा की गई है।

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