छत्तीसगढ़

धान खरीदी शुरू नहीं होने पर दीपावली तक अग्रिम भुगतान किया जाए: दीपक बैज

कम से कम एक एकड़ के धान का अग्रिम भुगतान सरकार करे

       रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार से मांग किया है कि दीपावली के पहले धान की खरीदी शुरू किया जाए। यदि धान की खरीदी नहीं शुरू होती है तो किसानों को कम से कम एक एकड़ के धान का अग्रिम भुगतान किया जाए ताकि किसान दीपावली की त्योहार मना सके। साल का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली सामने है यदि धान खरीदी दीपावली पर नहीं होगी तो किसान का हाथ खाली रहेगा ऐसे में त्योहार कैसे मनेगा? सरकार धान खरीदी दीपावली के पहले शुरू करे, यदि सरकार को धान खरीदी की तैयारी में दिक्कत है तो हर किसान के खाते में धान का अग्रिम राशि भुगतान किया जाए ताकि किसान दीपावली मना सके। जब धान खरीदी होगी तो उसमें यह राशि समायोजित की जाए। अमूमन दीपावली के समय कामगारों, कर्मचारियों को बोनस और अग्रिम देने की परंपरा है। यदि सरकार दीपावली के पहले धान नहीं खरीद सकता तो किसानों को अग्रिम राशि का भुगतान करे। धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू किया जाना चाहिये। 1 नवंबर तक किसानों का धान खेतो से खलिहान में आकर बेचने के लिये तैयार हो जाता है। सरकार के द्वारा अभी तक धान खरीदी के लिए कोई तारीख घोषित नहीं किया है जिससे किसान चिंतित है।

       प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अभी तक सरकार ने धान खरीदी के लिए कोई तिथि घोषित नहीं किया है और न ही धान खरीदी की जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू हुई है, न बारदाना की खरीदी हुई है और न ही सोसायटी खरीदी केंद्रों में व्यवस्था बनाई गई है। परिवहन के लिए भी अनुबंध नहीं हुआ है। ऐसे में लगता नहीं सरकार समय पर धान खरीदी कर सकेगी।

       दीपक बैज ने कहा कि पटवारी हड़ताल पर है सरकार उनकी हड़ताल को समाप्त करने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रही। पटवारियों की हड़ताल से पंजीयन कार्य भी प्रभावित है तथा हड़ताल से पीवी पोर्टल के माध्यम से फसल का भौतिक सत्यापन अभी रूका है। कब सत्यापन होगा? कब पंजीयन होगा? कब खरीदी होगी? इस परिस्थिति से किसान परेशान और चिंतित है।

      उन्होंने कहा कि जब से राज्य बना है, राज्योत्सव के दिन से ही धान खरीदी की परंपरा रही है। साय सरकार पिछले दो साल से 15 दिन देरी धान खरीदी शुरू करती है। ताकि कम किसानो का धान खरीदना पड़े। इस वर्ष भी सरकार की मंशा ठीक नहीं लग रही है। पिछले ढाई साल में केंद्र सरकार ने धान के एमएसपी में कुल 258 रूपए की वृद्धि की है। 2023 में वादा 3100 का था उस राशि में 258 जोड़कर किसानों को मिलना चाहिए, जिससे 3358 रूपए प्रति क्विंटल की मांग पूरी तरह वाजिब है। महंगाई के अनुपात में वर्तमान दर नाकाफी है। भाजपा सरकार किसानों को धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने का प्रचार तो खूब करती है, लेकिन पिछले दो बार से छत्तीसगढ़ के किसानों को बढ़ा हुआ समर्थन नहीं दिया गया। ये किसानों के साथ अन्याय है। पिछले खरीफ सीजन में धान खरीदी किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए टोकन, बारदाना, उठाव, गिरदावरी और रकबा सत्यापन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा था। जिसके चलते लाखों किसानों ने अपना उपज नहीं बेच पाया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker