छत्तीसगढ़

वोट से विवाद तक: ज्ञानेश कुमार को लेकर दीपक बैज ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल

       रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बैज ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया।

       हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे।

       बैज ने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार किया जाना आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि SIR के दौरान देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाता नामों को प्रभावित किए जाने की बात सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ चुनावी डेटा तक पहुंच से जुड़े मामलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

       प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार उनके इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाता रहा है और अब चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों से उन सवालों को और बल मिला है।

       बैज ने कहा कि Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और मतदाता नामों को हटाने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form-6 में SIR से संबंधित नया प्रावधान जोड़े जाने पर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।

       उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों की अब नए घटनाक्रम के बाद फिर चर्चा हो रही है। बैज ने SIR से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

       बैज ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर पहले भी पहल की गई है और भविष्य में संसद में इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।

       वहीं, रिपोर्टों के बीच चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर विचार-विमर्श और मतभेद सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR सहित प्रमुख निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए

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