छत्तीसगढ़

सेवा बनी संकल्प, जनभागीदारी बनी शक्ति—विकसित भारत के सपने को आकार देता छत्तीसगढ़

डॉ. ओम प्रकाश डहरिया (सहा. जनसंपर्क अधिकारी) 
       रायपुर। भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में जनसेवा केवल शासन का दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की वह सतत प्रक्रिया है, जिसमें सरकार और समाज मिलकर भविष्य की दिशा तय करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष इसी सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में सामने आते हैं। इसी यात्रा के प्रति जन-आभार व्यक्त करने और विकसित भारत-2047 के सामूहिक लक्ष्य को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया जा रहा है।
       ‘सेवा संकल्प अभियान’ को केवल आयोजनों की श्रृंखला मानना इसके व्यापक उद्देश्य को सीमित करना होगा। यह अभियान सेवा, जनभागीदारी, जनप्रतिनिधित्व और विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को एक साझा मंच प्रदान करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र नागरिकों तक पहुंचाने के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बनाने का प्रयास किया जाएगा। अभियान की मूल भावना यही है कि सरकार की उपलब्धियां तभी सार्थक हैं, जब उनका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और विकास की यात्रा में समाज की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे।
       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा को केवल वर्षों के हिसाब से नहीं देखा जा सकता। यह यात्रा नेतृत्व, जनसेवा, परिवर्तन और भारत की क्षमता में अटूट विश्वास की कहानी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी यात्रा के प्रति आभार को भविष्य के संकल्प से जोड़ता है। अतीत की उपलब्धियों का स्मरण केवल गौरव का विषय नहीं, बल्कि आने वाले भारत की जिम्मेदारी को समझने का अवसर भी है। विकसित भारत-2047 का लक्ष्य तभी वास्तविक जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को इस परिवर्तन का सहभागी महसूस करे।
       अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। हर घर में प्रज्वलित होने वाला दीप 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक बनेगा। यह पहल अपने आप में अभियान की मूल भावना को अभिव्यक्त करती है, क्योंकि राष्ट्र निर्माण हमेशा बड़े मंचों से ही नहीं होता; कभी-कभी एक छोटा-सा दीप भी सामूहिक चेतना का बड़ा प्रतीक बन जाता है। जब हजारों-लाखों घरों में एक साथ दीप प्रज्वलित होंगे, तो यह दृश्य केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि साझा विश्वास और सामूहिक संकल्प का होगा।
अभियान की एक महत्वपूर्ण पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ है। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक शासकीय एवं निजी विद्यालयों में विकसित भारत की संकल्पना और 25 वर्षों की सेवा यात्रा पर आधारित ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बच्चों की कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से सामने लाया जाएगा और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। किसी भी राष्ट्र का भविष्य केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं बनता, बल्कि उसकी नई पीढ़ी के सपनों और सोच से भी आकार लेता है। इसलिए बच्चों को विकसित भारत की कल्पना से जोड़ना भविष्य के भारत की नींव को मजबूत करने जैसा है।
       ‘नमो सेवा गाथा’ के माध्यम से 17 सितंबर से गांव-गांव तक नुक्कड़ नाट्य के जरिए 25 वर्षों की सेवा यात्रा, जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आए सकारात्मक बदलावों की कहानियां पहुंचाई जाएंगी। 2 अक्टूबर को देश के 100 प्रमुख स्थलों पर विशेष मंचन प्रस्तावित है। लोकभाषा, लोककला और प्रत्यक्ष संवाद की अपनी एक अलग ताकत होती है। यही कारण है कि नुक्कड़ नाट्य जैसी गतिविधियां सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आंकड़ों की भाषा से निकालकर आमजन की सहज समझ और अनुभव से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
       25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आंगन का उत्सव’ अभियान को मातृशक्ति, बच्चों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से जोड़ेगा। आंगनवाड़ी केंद्रों में माताओं एवं बच्चों की सहभागिता के साथ कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं अपने जीवन में आए बदलाव की कहानियां भी साझा करेंगी। किसी योजना की सफलता का सबसे मानवीय प्रमाण वह बदलाव है, जो किसी परिवार के जीवन में दिखाई देता है। इसलिए हितग्राहियों की अपनी आवाज में सामने आने वाली ये कहानियां अभियान को संवेदनशील और जीवंत स्वरूप देंगी।
       इसी भावना को ‘कहानी बदलाव की’ पहल आगे बढ़ाएगी। शासकीय योजनाओं से सकारात्मक बदलाव का अनुभव करने वाले हितग्राहियों की वास्तविक कहानियां संकलित की जाएंगी। प्रत्येक कहानी में हितग्राही का नाम, स्थान, जिला, संबंधित योजना और जीवन में आए बदलाव की जानकारी दर्ज की जाएगी तथा इन कहानियों का डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। यह पहल सरकारी योजनाओं की उपलब्धियों को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उन वास्तविक चेहरों और परिवारों के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास है, जिनके जीवन में इन योजनाओं ने परिवर्तन किया है।
       ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के माध्यम से गांव, जिला और राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। 25 वर्षों की सेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को मजबूत करने वाली यह यात्रा समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का माध्यम बनेगी। वहीं ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के अंतर्गत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं को सेवा गतिविधियों में सहभागी बनने का अवसर मिलेगा। नदी-घाट स्वच्छता सहित विभिन्न सेवा कार्यों में जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
       यह पहल इस विचार को मजबूत करती है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का कार्य नहीं है। समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर किया गया छोटा-सा सकारात्मक प्रयास भी देश की प्रगति में योगदान दे सकता है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा, जागरूकता और सामुदायिक सहयोग जैसे कार्य जब सामूहिक रूप लेते हैं, तो वे किसी योजना से कहीं बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
       ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब ले जाने का प्रयास होगा। विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर आयोजित शिविरों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ पात्र नागरिकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी तथा उन्हें योजनाओं से जोड़ने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा। लोकतंत्र की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जाती कि कितनी योजनाएं बनाई गईं, बल्कि इससे भी तय होती है कि उन योजनाओं का लाभ कितनी सहजता और पारदर्शिता से पात्र व्यक्ति तक पहुंचा। इस दृष्टि से ‘सरकार आपके द्वार’ शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने वाली महत्वपूर्ण पहल बन सकती है।
       अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘जल जन सेवा संकल्प’, ‘रंगोली राष्ट्र/भारत मंडल’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चौलेंज’ और ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के अंतर्गत परिवर्तनकारी स्थलों का भ्रमण तथा 7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति यात्रा’ का आयोजन प्रस्तावित है। वहीं ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चौलेंज’ जैसी पहलें युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा और नवाचार को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने का अवसर प्रदान करेंगी। ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ के माध्यम से लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई से लेकर संसद तक जनसेवा और जनभागीदारी के व्यापक विमर्श को एक मंच देने की परिकल्पना है।
       ‘सेवा संकल्प अभियान’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता में निहित एकता है। कहीं दीप के माध्यम से आभार है, कहीं बच्चों के सपनों में भविष्य का भारत है, कहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बदलाव की कहानी है, कहीं आंगनवाड़ी केंद्रों में मातृशक्ति का संवाद है, तो कहीं सेवा गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों का प्रत्यक्ष योगदान। कहीं सरकार आपके द्वार पहुंच रही है, तो कहीं नवाचार और जनप्रतिनिधित्व के माध्यम से विकसित भारत की दिशा में नए विचार सामने आ रहे हैं। ये सभी गतिविधियां मिलकर सेवा को केवल सरकारी अवधारणा न बनाकर सामाजिक संस्कार और राष्ट्रीय संकल्प का स्वरूप देने का प्रयास करती हैं।
       भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास की वास्तविक शक्ति तभी सामने आती है, जब शासन और समाज एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ते हैं। विकसित भारत-2047 कोई ऐसा लक्ष्य नहीं है जिसे केवल सरकारें प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए किसान, श्रमिक, युवा, महिला, उद्यमी, विद्यार्थी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिककृहर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए ‘सेवा संकल्प अभियान’ का वास्तविक अर्थ कार्यक्रमों की संख्या में नहीं, बल्कि उस भावना में है जो प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास दिलाती है कि राष्ट्र निर्माण में उसका योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
       छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला यह अभियान 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आने वाले भारत की तस्वीर गढ़ने का अवसर है। यह अतीत को नमन, वर्तमान में सेवा को मजबूत करने और भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प लेने की त्रिवेणी है। यदि इन पहलों में समाज की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो ‘सेवा संकल्प अभियान’ महज एक महीने का आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि सेवा की भावना को जनजीवन से जोड़ने वाला एक व्यापक सामाजिक अभियान बन सकता है।
       आखिरकार राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के सामूहिक विश्वास, सहभागिता और संकल्प में होती है। 25 वर्षों की सेवा यात्रा से प्रेरणा लेकर विकसित भारत-2047 की ओर बढ़ने का यही संदेश ‘सेवा संकल्प अभियान’ को एक कार्यक्रम से आगे ले जाकर जनभागीदारी के राष्ट्रीय संकल्प का स्वरूप देता हैकृ’’सेवा से संकल्प, संकल्प से सहभागिता और सहभागिता से विकसित भारत।

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