छत्तीसगढ़

प्रेमचंद का साहित्य अमूल्य धरोहर : लोक बाबू

प्रेमचंद जयंती पर हुई जसम की विचार गोष्ठी

       भिलाई। सियान सदन भिलाई नगर में प्रेमचंद जयंती पर जन संस्कृति मंच दुर्ग-भिलाई इकाई की विचार गोष्ठी सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ।

       प्रेमचंद का साहित्य हमारी संस्कृति, संवेदना और संघर्ष की अमूल्य धरोहर है। उक्ताशय के विचार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कथाकार लोकबाबू ने कहा।

       कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कथाकार कैलाश बनवासी ने प्रेमचंद के साहित्य को जनपक्षधर तथा वंचित तबको के जीवन संघर्ष को रचने वाला रचनाकार कहा।

       डॉक्टर सुबोध देवांगन ने अपने आधार-वक्तव्य में बताया कि प्रेमचंद का साहित्य केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें व्यक्त मानवीय संवेदना और सामाजिक प्रश्न आज की वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में भी अत्यंत प्रासंगिक है।

       “वर्तमान चुनौतियों के बरक्स प्रेमचंद” विषय पर डॉ. रजनीश उमरे के आलेख का वाचन दिव्या ने किया। उन्होंने प्रेमचंद के जीवन, उनकी रचनाएं और प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किया।

       डॉ. विद्याभूषण ने कहा कि समय तो बदला है किंतु प्रेमचंद के कहानी व उपन्यासों में तत्कालीन समाज के पात्रों होरी, घीसू, माधव जैसे किसानों और मजदूरों के दिन अब भी नहीं बदले हैं।

       कवि घनश्याम त्रिपाठी ने कहा कि चर्चित कथाकार लोक बाबू और कैलाश वनवासी की कहानियाँ प्रेमचंद की परंपरा से जुड़ते हुए आगे निकलती दिखती हैं।

       डॉ. रीता गुप्ता ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर अपने विचार व्यक्त किये। कवयित्री मीता दास ने कहा कि प्रेमचंद का कथा-साहित्य एक प्रकाश स्तंभ है, जो आज भी हमें रास्ता दिखाता है।

       कार्यक्रम का संचालन अशोक तिवारी ने तथा आभार प्रदर्शन डॉ. एन. पापा राव ने किया। इस अवसर पर शरद कोकास, शायर मुमताज, डॉ. संजय दानी सहित साहित्य-प्रेमी व महाविद्यालयीन विद्यार्थीगण उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker