छत्तीसगढ़

10 हजार श्रमिकों पर मंडरा रहा संकट टला! ऐतिहासिक आंदोलन के बाद नौकरी बची

       भिलाई। ओडिशा के विद्युत क्षेत्र में निजीकरण के प्रभाव के कारण टाटा पावर कंपनी द्वारा लगभग 10,000 बिजली ठेका श्रमिकों की छंटनी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लागत में कटौती के उद्देश्य से इन श्रमिकों को हटाने संबंधी सुझाव देने वाले ओडिशा विद्युत नियामक आयोग (OERC) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जेना (IAS) ने अब अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

       ओडिशा राज्य के बिजली क्षेत्र में कार्यरत ठेका श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा एवं आजीविका संरक्षण के लिए भारतीय मजदूर संघ द्वारा दिनांक 18 मई 2026 से प्रारंभ किया गया ऐतिहासिक संघर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है।

       ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों तथा आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय चर्चा के बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए हैं—

• किसी भी बिजली ठेका श्रमिक की छंटनी नहीं की जाएगी।
• पूर्व में प्रभावित श्रमिकों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं न्यायोचित तरीके से विचार किया जाएगा।
• इस विषय पर शीघ्र ही ओडिशा सरकार, टाटा पावर कंपनी तथा भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों की बैठक

       आयोजित की जाएगी, जिसमें लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।

       यह सफलता भारतीय मजदूर संघ के प्रभावी नेतृत्व तथा देशभर की श्रमिक संगठनों द्वारा प्रदर्शित एकजुटता और संघर्षशीलता का परिणाम है।

       इस आंदोलन में अखिल भारतीय ठेका मजदूर महासंघ के अखिल भारतीय महामंत्री सचिन मेंगाळे तथा महाराष्ट्र विद्युत ठेका कामगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश खरात ने भुवनेश्वर में प्रत्यक्ष उपस्थित रहकर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और श्रमिकों का मार्गदर्शन किया।

       महासंघ की ओर से माननीय प्रधानमंत्री, माननीय केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, माननीय ओडिशा के मुख्यमंत्री तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडे ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्रमिकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया था।

       इस संघर्ष को देश के विभिन्न राज्यों की बिजली श्रमिक यूनियनों तथा अन्य क्षेत्रों की ठेका श्रमिक संगठनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों में आयोजित प्रदर्शन, ज्ञापन एवं समर्थन आंदोलनों के कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा और व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ।

       इस ऐतिहासिक आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष बादल महांती, प्रदेश महामंत्री पृथ्वीराज पंडा, श्रीमती अंजली पटेल, ठेका श्रमिक प्रभारी श्रीनिवास राव, सत्यब्रत स्वाईन, अखिल भारतीय ठेका मजदूर महासंघ के अखिल भारतीय सचिव, ओडिशा ठेका श्रमिक संगठन के प्रमुख नेता कमलेश महापात्र, महासचिव कपिलेश्वर महापात्र, अध्यक्ष मलय परिडा तथा भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा के अनेक पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

       चर्चा प्रक्रिया में पिपिली के विधायक आश्रित पटनायक, अन्य जनप्रतिनिधि, भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ता तथा सामाजिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

       यह विजय एक बार फिर सिद्ध करती है कि देश के किसी भी राज्य में श्रमिकों पर अन्याय होने पर सभी राज्यों की श्रमिक शक्तियां एकजुट होकर संघर्ष खड़ा करती हैं और संगठित शक्ति के बल पर सफलता प्राप्त करती हैं। यह विचार अखिल भारतीय ठेका मजदूर महासंघ के महामंत्री सचिन मेंगाळे तथा महाराष्ट्र वीज कंत्राटी कामगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष निलेश खरात ने व्यक्त किए।

       इस संघर्ष ने श्रमिकों के मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित एवं एकात्मिक कार्रवाई के महत्व को भी रेखांकित किया है। “श्रमिक एकता – राष्ट्रीय एकता – श्रमिकों की विजय” का संदेश इस आंदोलन से और अधिक सशक्त हुआ है।

       अखिल भारतीय ठेका मजदूर महासंघ ओडिशा के सभी बिजली ठेका श्रमिकों, आंदोलन का नेतृत्व करने वाले पदाधिकारियों, भारतीय मजदूर संघ तथा इस ऐतिहासिक संघर्ष को समर्थन देने वाली सभी राज्य इकाइयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता है।

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