छत्तीसगढ़

लेबर कोड के विरोध में भिलाई में उग्र प्रदर्शन! ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

        भिलाई। संयुक्त ट्रेड यूनियन भिलाई द्वारा 12 मई को केंद्रीय श्रम संगठनों के आव्हान पर संघर्षरत श्रमिकों के साथ एकजुटता में राष्ट्रीय मांग दिवस के अवसर पर और कारपोरेट परस्त व मजदूर विरोधी लेबर कोड को अधिसूचित करने के खिलाफ सेक्टर 6, भिलाई में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. प्रदर्शन के माध्यम से एक ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर दुर्ग को सौंपा गया। प्रदर्शन में इंटक,सीटू,एटक, ऐक्टू, एस डब्लू यू, लोइमू आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

       संयुक्त ट्रेड यूनियन भिलाई द्वारा आज विरोध प्रदर्शन के माध्यम से उत्तरी व मध्य भारत के बड़े हिस्से में संविदा व ठेका श्रमिकों की अमानवीय शोषण के खिलाफ औद्योगिक श्रमिकों के प्रतिरोध का सरकारों द्वारा बर्बर दमन करने की तीव्र निंदा किया गया .यह निर्दोष श्रमिकों और आम लोगों पर सीधा हमला है. जिसमें राज्य तंत्र कॉर्पोरेट हितों के लिए खुलेआम काम कर रहा है.यह श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ राज्य समर्थित कॉर्पोरेट हमला है।

       वक्ताओं ने आगे कहा कि राहत प्रदान करने के लिए संवाद करने के बजाय सरकारों ने दमनकारी कार्यवाही की है. 1000 से अधिक श्रमिकों को गिरफ्तार किया गया.पुलिस ने छापेमारी, दमन और निगरानी का इस्तेमाल करते हुए आतंक का माहौल बना दिया है.कई श्रमिक नेताओं को झूठे आरोपों में फंसा कर जेल में डाल दिया गया है. श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की बजाय एक दुष्प्रचार अभियान के माध्यम से उन्हें “बाहरी” या “राष्ट्र विरोधी” करार दिया जा रहा है. श्रम संहिताएं कार्य घंटे को बढाकर और संविदा प्रणाली को मजबूत करके शोषण को वैध बनाती है.महिला श्रमिकों को कार्य स्थल पर हर तरह के उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है।

इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से निम्न मांग किया गया

1. गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और कार्यकर्ताओं को तत्काल और बिना शर्त रिहा किया जाए,सभी झूठे मामलों को वापस दिया जाए, दमन और अवैध हिरासत को बंद किया जाए।

2. श्रमिक विरोधी चारों श्रम संहिताओं को वापस दिया जाए।

3. न्यूनतम वेतन ₹26000 प्रति माह किया जाए।

4. 8 घंटे का कार्य दिवस, अतिरिक्त काम के लिए दुगना ओवरटाइम भुगतान, कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अन्य वैधानिक वैधानिक लाभ दिया जाए।

5. सस्ती एलपीजी और आवश्यक वस्तुओं की महंगाई पर नियंत्रण किया जाए।

6. ट्रेड यूनियन के साथ तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता और भारतीय श्रम सम्मेलन का तत्काल आयोजन किया जाए।

       वक्ताओं ने कहा कि अमानवीय शोषण के खिलाफ प्रतिरोध को मजबूत करना होगा और श्रमिक आंदोलन के खिलाफ सरकारों की दमनकारी राजनीति का भंडाफोड़ करना होगा।

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