छत्तीसगढ़

संस्कृति की नई आवाज़: जन संस्कृति मंच के राज्य सम्मेलन में जुटे विचार

न्याय आज्ञाकारिता से ऊपर है – रामजी राय

       रायपुर। न्याय आज्ञाकारिता से ऊपर है। सामंती व्यवस्था, राजशाही व्यवस्था, तानाशाही व्यवस्था, फासीवादी व्यवस्था सब आज्ञाकारिता सिखाते हैं। इसीलिए सत्ता जो कहे, वही सत्य है, शिव है, सुंदर है और आप जो कहे वह असत्य है, अशिव है और कुरूप है। सूरज के धब्बे को उंगली दिखाकर धब्बा कहने वाला ही बुद्धिजीवी है। संशयात्मक होना खतरनाक है। इंकार करना सीखा जाए। विवेक को जागृत किया जाए। मुख्य अतिथि प्रखर वक्ता मार्क्सवादी चिंतक रामजी राय ने उक्ताशय के विचार रखे।

       आलोचक सियाराम शर्मा ने कहा कि कुछ वर्षों से हमारे देश में अत्यंत ही क्रूर और बर्बर फासीवादी सत्ता कायम है, जिसने सारे लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं को नष्ट कर दिया है। उसने समाज में नफरत, घृणा, हिंसा और द्वेष फैलाकर देश को भीतर से विभाजित कर दिया है। अंध राष्ट्रवाद, सर्व सत्तावाद, कॉरपोरेटिज्म, वैचारिक वैविध्य का अस्वीकार, लफ्फाजी, लूट और झूठ इसकी प्रमुख लाक्षणिक विशेषताएं हैं।

       जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने जन संस्कृति मंच के 40 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ के पहले राज्य सम्मेलन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि फासीवाद अपने षड़यंत्रों से लोकतंत्र के स्तंभों को नियंत्रित करता है। संस्कृति कर्मियों को चाहिए कि लहू पीने वाली मशीनों का पर्दाफाश करें।

       आलोचक प्रेमशंकर ने कहा कि हम फासीवाद के अश्लीलतम समय में रह रहे हैं। हमें संगठन के विस्तार की जरूरत है। सुगठित और संगठित होने से ही प्रतिरोध का रास्ता निकलेगा।

       प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर के अध्यक्ष अरुणकान्त शुक्ला ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भारत के अंदर नया फासीवाद देखने को मिल रहा है। हमने संविधान की वैज्ञानिक सोच की अवधारणा को गहरे दफ़न कर दिया है।

       इस राज्य सम्मेलन में जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष डॉ. सुखनंदन सिंह ध्रुव, इप्टा के रंगकर्मी शेखर नाग ने भी महत्वपूर्ण उद्बोधन दिया।

       जन संस्कृति मंच से जुड़े कवियों द्वारा विचारोत्तेजक कविताएं पढ़ीं गईं, जिसमें डॉ. अंजन कुमार, हरगोविंद पुरी, भानुप्रकाश रघुवंशी, मुदित मिश्रा, निहाल, गौरव, माधुरी मारकंडेय, दिव्या, सानियारा खान, सुनीता और मीता दास शामिल थीं। डॉ. पूनम संजू ने करमा लोकनृत्य की नयनाभिराम प्रस्तुति दी। इंडियन रोलर बैंड के युवा कलाकारों ने समाज को जगाने वाले अपने धारदार गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को झकझोरकर रख दिया। दुर्ग-भिलाई इकाई की ओर से महत्वपूर्ण नाटक ‘आओ अब लौट चलें’ का मंचन हुआ। यह कार्पोरेट, पूंजीवाद के दौर में सबके न्याय की मार्क्स के समाजवादी संघर्षों को बहुत मार्मिकता से दिखाता है। जयप्रकाश नायर ने बहुत प्रभावशाली अभिनय किया। इसे व्यापक स्वीकृति और सराहना मिली। इसके संगीत निर्देशक सुलेमान खान थे।

       वृंदावन हाल रायपुर में आयोजित उक्त राज्य सम्मेलन के विभिन्न समयांतरालों में हरगोविंद पुरी, भानुप्रकाश रघुवंशी, जसपाल बांगा, महेश कुशवाहा, श्याम सुंदर मुदगल, नीलम सिंह यादव, समीक्षा नायर, सुनीता और वर्षा बोपचे ने संगीतमय जनगीतों की प्रस्तुति दी।

       इस सम्मेलन में पंकज दीक्षित, दुर्गेश भार्गव और चित्रकार सर्वज्ञ नायर द्वारा बनाए गए महत्वपूर्ण कविता पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

       सांगठनिक सत्र में जन संस्कृति मंच की विभिन्न इकाइयों के सचिवों द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान संगठन की इकाइयों की समीक्षा की गई। वरिष्ठ कथाकार कैलाश बनवासी, मीता दास, घनश्याम त्रिपाठी, सुलेमान खान आदि ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया।विचार विमर्श पश्चात जन संस्कृति मंच की पहली छत्तीसगढ़ राज्य इकाई का सर्वसम्मति से गठन किया गया। अध्यक्ष रूपेन्द्र तिवारी और सचिव राजकुमार सोनी चुने गए।

       राज्य सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी, पत्रकार और बुद्धिजीवी उपस्थित थे। सम्मेलन का संचालन दीपक सिंह तथा आभार प्रदर्शन राष्ट्रीय सचिव राजकुमार सोनी ने किया।

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