छत्तीसगढ़

सरकार ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए व्हाट्सएप को निर्देश दिए

       नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड—खासकर “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम—पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने WhatsApp को सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसे डिवाइस की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जाए, जिनका इस्तेमाल ठग बार-बार फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने में कर रहे हैं। इस फैसले का मकसद स्कैमर्स की जड़ पर वार करना है, ताकि वे एक ही फोन से नए-नए नंबर बनाकर फ्रॉड न कर सकें।

क्या है सरकार का नया प्लान?

       सरकार ने व्हाट्सऐप को IMEI नंबर, MAC एड्रेस, डिवाइस सीरियल और अन्य यूनिक पहचान के आधार पर संदिग्ध डिवाइस को ब्लॉक करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। इससे ठगों के लिए बार-बार नया अकाउंट बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

यूजर्स को बचाने के लिए 5 बड़े सेफ्टी फीचर्स

1. डिवाइस ID ब्लॉकिंग
अब सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि पूरा डिवाइस ही ब्लैकलिस्ट होगा—यानी “एक बार पकड़े गए, तो हमेशा के लिए बैन”।

2. एडवांस्ड कॉल सेफ्टी सिस्टम
स्काइप जैसे फीचर्स लाकर कॉलर की पूरी जानकारी दिखाई जाएगी और संदिग्ध कॉल पर तुरंत वार्निंग मिलेगी।

3. स्कैम डिटेक्शन टेक्नोलॉजी
AI आधारित सिस्टम ठगों के नेटवर्क को पहचानकर उन्हें पहले ही ब्लॉक करने की कोशिश करेगा।

4. फर्जी APK और लिंक पर रोक
मैलिशियस ऐप्स और खतरनाक फाइलों को ऑटो-डिटेक्ट कर ब्लॉक किया जाएगा, जिससे फोन हैक होने का खतरा कम होगा।

5. SIM बाइंडिंग और ऑटो-लॉगआउट
व्हाट्सऐप अकाउंट केवल एक्टिव SIM से ही चलेगा। SIM बदलते ही अकाउंट लॉक हो सकता है। साथ ही वेब/डेस्कटॉप सेशन हर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट होंगे।

क्या है “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम?

       यह नया साइबर जाल बेहद खतरनाक है। ठग खुद को पुलिस, CBI या ED अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं—“आप गिरफ्तार हो चुके हैं!”
फिर शुरू होता है असली खेल…

ऐसे फंसाते हैं ठग:

  • अनजान नंबर से कॉल या वीडियो कॉल
  • मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स जैसे गंभीर आरोप
  • घंटों वीडियो कॉल पर “नकली गिरफ्तारी”
  • AI वॉइस, फर्जी यूनिफॉर्म और नकली ऑफिस बैकग्राउंड
  • “जमानत” या “क्लियरेंस फीस” के नाम पर पैसे की मांग

       पीड़ित को इतना डरा दिया जाता है कि वह बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर देता है।

चौंकाने वाले आंकड़े

       2024 में भारत में ऐसे 1.23 लाख से ज्यादा मामले सामने आए, जिनमें करीब ₹1,935 करोड़ की ठगी हुई। यह दिखाता है कि साइबर अपराध कितनी तेजी से बढ़ रहा है।

कैसे बचें इस स्कैम से?

  • याद रखें: भारत में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानून नहीं है
  • कोई भी असली पुलिस वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
  • तुरंत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
  • Two-Step Verification चालू रखें
  • अनजान कॉल/मैसेज पर तुरंत Block & Report करें

       सरकार का यह कदम साइबर ठगों के खिलाफ बड़ा डिजिटल स्ट्राइक माना जा रहा है। जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी से स्कैम बढ़ रहे हैं, वहीं अब उसी टेक्नोलॉजी से उन्हें रोकने की तैयारी भी तेज हो गई है।

       अब सवाल ये है—क्या ये नए नियम ठगों को पूरी तरह रोक पाएंगे, या साइबर अपराधी फिर कोई नया रास्ता ढूंढ लेंगे?

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