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रसोई गैस पर नया टाइम-रूल—अब इंतजार के बाद ही बुक होगा सिलेंडर

       नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग को लेकर सरकार ने नया नियम लागू किया है। इसके तहत अब शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की जा सकेगी, जबकि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। पहले यह समय आमतौर पर 21 से 25 दिन के बीच माना जाता था।

       यह नियम मुख्य रूप से देश की प्रमुख गैस कंपनियों जैसे Indane, HP Gas और Bharat Gas की सप्लाई व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए लागू किया गया है।

क्यों बदला गया नियम

       सरकार और गैस कंपनियों के अनुसार कई उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक कर लेते थे, जिससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव पड़ता था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में तनाव और गैस आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए भी यह कदम उठाया गया है।

       ग्रामीण इलाकों में गैस की खपत अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, इसलिए वहां बुकिंग के बीच लंबा अंतराल तय किया गया है।

अन्य नए नियम भी लागू

       गैस डिलीवरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अब OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। सिलेंडर डिलीवरी के समय उपभोक्ता के मोबाइल पर आने वाला OTP बताने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाएगी। इससे फर्जी डिलीवरी और गलत रिकॉर्ड की समस्या को रोकने में मदद मिलेगी।

       सरकार का कहना है कि देश में घरेलू LPG की कोई कमी नहीं है और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। सामान्य परिस्थितियों में बुकिंग के 2–3 दिनों के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी दी जा रही है।

ग्रामीण परिवारों को हो रही परेशानी

       हालांकि इस नए नियम से कई ग्रामीण परिवारों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।

1. बड़े परिवारों में ज्यादा खपत
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बड़े परिवार होते हैं, जहां गैस की खपत ज्यादा होती है। ऐसे में 45 दिन का इंतजार करना मुश्किल हो सकता है।

2. सप्लाई अनियमित होने की समस्या
कई गांवों में गैस की डिलीवरी पहले से ही नियमित नहीं होती। यदि सिलेंडर देर से पहुंचे तो 45 दिन का अंतराल रसोई व्यवस्था को और कठिन बना देता है।

3. त्योहार और मौसम का असर
त्योहार, शादी या मेहमान आने के समय खाना बनाने की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन तय अंतराल के कारण अतिरिक्त सिलेंडर लेना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों के सुझाव

       ऊर्जा और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने कुछ समाधान भी सुझाए हैं।

फ्लेक्सिबल नियम:
       दूरदराज क्षेत्रों या बड़े परिवारों के लिए विशेष अनुमति देकर जल्दी बुकिंग की सुविधा दी जा सकती है।

वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा:
       ग्रामीण इलाकों में बायोगैस प्लांट, सौर कुकर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई जा रही है।

कम्युनिटी स्टोरेज सिस्टम:
       विशेषज्ञों का सुझाव है कि गांव स्तर पर छोटे LPG स्टोरेज या कम्युनिटी वितरण केंद्र बनाए जाएं, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत गैस उपलब्ध हो सके।

       विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुझावों पर अमल किया जाए तो नए नियमों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की उपलब्धता को बेहतर बनाया जा सकता है।

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