छत्तीसगढ़

फूलों की खुशबू, प्रकृति का रंग: अहिवारा की हरित होली

       अहिवारा। होली के रंग इस बार अहिवारा में केवल चेहरे ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी मुस्कुराने का संदेश दे रहे हैं। नगर पालिका परिषद अहिवारा के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने रसायन-मुक्त, त्वचा के लिए सुरक्षित और पूरी तरह प्राकृतिक ऑर्गेनिक रंग तैयार किए हैं।

प्रकृति से रंग, सुरक्षा के संग

       इन रंगों को बनाने में प्राकृतिक फूलों, हल्दी, चुकंदर, पालक और अन्य जैविक पदार्थों का उपयोग किया गया है। खास बात यह है कि इनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन का प्रयोग नहीं किया गया। इससे ये रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि जल और मिट्टी को भी प्रदूषित नहीं करते।

स्थानीय स्वावलंबन को बढ़ावा

       नगर पालिका द्वारा इस पहल की सराहना करते हुए नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस होली स्वदेशी और ऑर्गेनिक रंगों का उपयोग करें। इससे एक ओर पर्यावरण संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिलेगा।

       ऑर्गेनिक रंगों की बिक्री नगर पालिका परिसर एवं निर्धारित विक्रय केंद्रों पर की जा रही है। पहले ही दिन 500 रुपये की बिक्री दर्ज की गई, जो इस पहल के प्रति लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

जनप्रतिनिधियों का संदेश

       नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा, उपाध्यक्ष अशोक बाफना, मुख्य नगर पालिका अधिकारी अंकुर पाण्डेय, उपअभियंता खिलानंद कुल्हारे, गोस्वामी आकाश भारती तथा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सभी नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल होली की शुभकामनाएँ दी हैं।

संदेश साफ है

       इस बार होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का भी पर्व बने—जहाँ हर गुलाल में प्रकृति की खुशबू हो और हर मुस्कान में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प।

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