छत्तीसगढ़

स्त्री-संकल्प की सिनेमाई आवाज़: भिलाई में निर्मित फिल्म ‘रमाई’ का दुर्ग में भव्य प्रीमियर

      भिलाई/दुर्ग। जब सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संवेदना और संघर्ष की आवाज़ बन जाए, तब वह समाज के भीतर गहरे तक उतरता है। ऐसी ही एक सशक्त और प्रेरणादायक हिंदी फिल्म ‘रमाई’ (Ramaai) का प्रीमियर छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर स्थित तरुण टॉकीज (Tarun LV Cinemas) में भव्य रूप से आयोजित किया गया। भिलाई (छत्तीसगढ़) में निर्मित यह फिल्म 6 फरवरी 2026 से सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए प्रदर्शित की जा रही है।

       फिल्म ‘रमाई’ नारी शक्ति, त्याग और आत्मसम्मान की उस कहानी को पर्दे पर जीवंत करती है, जो अक्सर इतिहास और समाज के शोर में अनसुनी रह जाती है। प्रीमियर के अवसर पर सिनेमा हॉल में खासा उत्साह देखने को मिला, जहां फिल्म से जुड़े कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यप्रेमियों और आम दर्शकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

हर स्त्री की अडिग आवाज़ है ‘रमाई’

       फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री प्रेरणा धाबर्डे ने प्रीमियर के दौरान ‘रमाई’ को अपने लिए केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विशेष और आत्मिक यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उस भावना का प्रतिनिधित्व करती है, जहां हर महिला कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने अस्तित्व और आत्मबल के साथ खड़ी रहती है।

प्रेरणा धाबर्डे के अनुसार,

       “रमाई हर उस स्त्री की कहानी है, जो टूटती नहीं, झुकती नहीं और हालात से समझौता किए बिना अपनी राह खुद बनाती है। यह फिल्म चुपचाप सहने वाली महिलाओं की आवाज़ है।”

       उनकी यह टिप्पणी दर्शाती है कि ‘रमाई’ सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि एक विचार है — जो आज की स्त्री को भी अपने भीतर झांकने का अवसर देता है।

छत्तीसगढ़ की धरती से निकली सशक्त कहानी

       भिलाई में निर्मित इस फिल्म का छत्तीसगढ़ में ही प्रीमियर होना स्थानीय सिनेमा और रचनात्मकता के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। ‘रमाई’ यह साबित करती है कि बड़े संदेशों के लिए बड़े शहरों की नहीं, बल्कि ईमानदार दृष्टि और संवेदनशील सोच की ज़रूरत होती है।

       फिल्म की कहानी, संवाद और प्रस्तुति में स्थानीयपन के साथ-साथ सार्वभौमिक मानवीय भावनाएं देखने को मिलती हैं, जो इसे हर वर्ग और हर क्षेत्र के दर्शकों से जोड़ती हैं।

सिनेमा जो सोच को झकझोरता है

       ‘रमाई’ उन फिल्मों की श्रेणी में खड़ी होती है, जो मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। यह फिल्म स्त्री संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक जटिलताओं को बेहद सधे हुए और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

       प्रीमियर के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया भी यही संकेत देती है कि फिल्म भावनात्मक रूप से गहरी छाप छोड़ने में सफल रही है। कई दर्शकों ने इसे “दिल को छू लेने वाली” और “समाज को आईना दिखाने वाली” फिल्म बताया।

6 फरवरी 2026 से दर्शकों के लिए उपलब्ध

       फिल्म ‘रमाई’ 6 फरवरी 2026 से सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो चुकी है और धीरे-धीरे दर्शकों के बीच अपनी जगह बना रही है। यह फिल्म खासतौर पर उन दर्शकों के लिए है, जो सिनेमा में केवल चमक-दमक नहीं, बल्कि अर्थ और आत्मा तलाशते हैं।

 

सारांश

       ‘रमाई’ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अनुभव है — जो बताती है कि चुप रहना कमजोरी नहीं, और सहना हार नहीं।

       छत्तीसगढ़ की धरती से निकली यह सिनेमाई आवाज़ हर उस स्त्री को समर्पित है जो हालात से लड़ते हुए भी अपनी पहचान नहीं छोड़ती।

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