छत्तीसगढ़रायपुर

खेत से खरीदी केंद्र तक संघर्ष: प्रवीण दुबे ने उजागर की उपार्जन व्यवस्था की खामियां

धान उपार्जन की अव्यवस्थाओं पर प्रवीण दुबे की सशक्त पहल, किसानों के अधिकारों की मजबूती से उठाई आवाज

किसान हित में बड़ा कदम: धान उपार्जन की समस्याओं को लेकर प्रवीण दुबे ने MARKFED को सौंपा मांग-पत्र

हजारों किसानों को राहत दिलाने की पहल, धान खरीदी की खामियों पर प्रवीण दुबे का हस्तक्षेप

धान उपार्जन व्यवस्था में सुधार की मांग, सहकारिता नेता प्रवीण दुबे ने मार्कफेड को लिखा पत्र

       रायपुर। छत्तीसगढ़ में संचालित धान उपार्जन केंद्रों पर समिति-स्तर पर उत्पन्न प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक अव्यवस्थाओं को लेकर भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रवीण दुबे ने किसानों के हित में सशक्त पहल करते हुए महानिदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य विपणन सहकारी संघ (MARKFED) को विस्तृत मांग-पत्र सौंपा है।

प्रवीण दुबे का कहना है कि, वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष में हजारों पात्र कृषक विभिन्न तकनीकी एवं नीतिगत कारणों से धान विक्रय से वंचित हो रहे हैं, जो न केवल किसान हितों के प्रतिकूल है, बल्कि शासन की सुव्यवस्थित उपार्जन प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

       उन्होंने प्रमुख रूप से एग्रीटेक पंजीयन में आ रही तकनीकी बाधाओं, वनभूमि पट्टाधारी कृषकों की उपेक्षा, बड़े एवं बहुफसली कृषकों के टोकन निर्गमन में जटिलता, प्रतिदिन धान उपार्जन की अपर्याप्त सीमा तथा धान उठाव एवं परिवहन में हो रहे विलंब जैसे गंभीर विषयों को तथ्यात्मक रूप से रेखांकित किया है।

       प्रवीण दुबे ने मांग की है कि, समिति स्तर पर भौतिक सत्यापन कर वंचित कृषकों को तत्काल राहत दी जाए, वनभूमि पट्टाधारी किसानों को पुनः खरीदी व्यवस्था में शामिल किया जाए तथा ऑफलाइन टोकन प्रणाली एवं दैनिक उपार्जन सीमा में वृद्धि जैसे व्यावहारिक समाधान शीघ्र लागू किए जाएं।

       प्रवीण दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धान उपार्जन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्नदाताओं के सम्मान, अधिकार और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। किसानों को उनके पसीने का पूरा मूल्य समय पर मिलना चाहिए, इसके लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

       सहकारिता के क्षेत्र में पिछले कई दशकों से निरंतर सक्रिय रहकर किसानों के अधिकारों और हितों की आवाज बुलंद करते आ रहे प्रवीण दुबे की यह पहल किसान हितों की दृढ़ एवं प्रतिबद्ध रक्षा की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है।

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